Psalms 61

de novissimo terrae ad te clamabo cum triste fuerit cor meum cum fortis elevabitur adversum me tu eris ductor meus
हे परमेश्वर, मेरा प्रार्थना गीत सुन। मेरी विनती सुन।
fuisti spes mea turris munitissima a facie inimici
जहाँ भी मैं कितनी ही निर्बलता में होऊँ, मैं सहायता पाने को तुझको पुकारूँगा! जब मेरा मन भारी हो और बहुत दु:खी हो, तू मुझको बहुत ऊँचे सुरक्षित स्थान पर ले चल।
habitabo in tabernaculo tuo iugiter sperabo in protectione alarum tuarum semper
तू ही मेरा शरणस्थल है! तू ही मेरा सुदृढ़ गढ़ है, जो मुझे मेरे शत्रुओं से बचाता है।
tu enim Deus exaudisti orationem meam dedisti hereditatem timentibus nomen tuum
तेरे डेरे में, मैं सदा सदा के लिए निवास करूँगा। मैं वहाँ छिपूँगा जहाँ तू मुझे बचा सके।
dies super dies regis adicies annos eius donec est generatio et generatio
हे परमेश्वर, तूने मेरी वह मन्नत सुनी है, जिसे तुझ पर चढ़ाऊँगा, किन्तु तेरे भक्तों के पास हर वस्तु उन्हें तुझसे ही मिली है।
sedebit semper ante faciem Dei misericordia et veritas servabunt eum
राजा को लम्बी आयु दे। उसको चिरकाल तक जीने दे!
sic canam nomini tuo iugiter reddens vota mea per singulos dies
उसको सदा परमेश्वर के साथ में बना रहने दे! तू उसकी रक्षा निज सच्चे प्रेम से कर।
victori per Idithun canticum David attamen apud Deum silebit anima mea ex eo salus mea
मैं तेरे नाम का गुण सदा गाऊँगा। उन बातों को करूँगा जिनके करने का वचन मैंने दिया है।