Leviticus 13

यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,
Und Jehova redete zu Mose und zu Aaron und sprach:
“किसी व्यक्ति के चर्म पर कोई भयंकर सूजन हो सकती है, या खुजली अथवा सफेद दाग हो सकते हैं। यदि घाव चर्मरोग की तरह दिखाई पड़े तो व्यक्ति को याजक हारून या उसके किसी एक याजक पुत्र के पास लाया जाना चाहिए।
Wenn ein Mensch in der Haut seines Fleisches eine Erhöhung oder einen Grind oder einen Flecken bekommt, und es wird in der Haut seines Fleisches zu einem Aussatzübel, so soll er zu Aaron, dem Priester, gebracht werden, oder zu einem von seinen Söhnen, den Priestern.
याजकों को व्यक्ति के चर्म के घाव को देखना चाहिए। यदि घाव के बाल सफेद हो गए हों और घाव व्यक्ति के चर्म से अधिक गहरा मालूम हो तो यह भयंकर चर्म रोग है. जब याजक व्यक्ति की जाँच खत्म करे तो उसे घोषणा करनी चाहिए कि व्यक्ति अशुद्ध है।
Und besieht der Priester das Übel in der Haut des Fleisches, und das Haar in dem Übel hat sich in weiß verwandelt, und das Übel erscheint tiefer als die Haut seines Fleisches, so ist es das Übel des Aussatzes; und sieht es der Priester, so soll er ihn für unrein erklären.
“कभी कभी किसी व्यक्ति के चर्म पर कोई सफेद दाग हो जाता है किन्तु दाग चर्म से गहरा नहीं मालूम होता। यदि वह सत्य हो तो याजक उस व्यक्ति को सात दिन के लिए अन्य लोगों से अलग करे।
Und wenn der Flecken in der Haut seines Fleisches weiß ist, und er nicht tiefer erscheint als die Haut, und sein Haar hat sich nicht in weiß verwandelt, so soll der Priester den, der das Übel hat, sieben Tage einschließen.
सातवे दिन याजक को उस व्यक्ति की जाँच करनी चाहिए। यदि याजक देखे कि घाव में परिवर्तन नहीं हुआ है और वह चर्म पर और अधिक फैला नहीं है तो याजक को और सात दिन के लिए उसे अलग करना चाहिए।
Und besieht es der Priester am siebten Tage, und siehe, das Übel ist in seinen Augen stehen geblieben, das Übel hat nicht um sich gegriffen in der Haut, so soll der Priester ihn zum zweiten Male sieben Tage einschließen.
सात दिन बाद याजक को उस व्यक्ति की फिर जांच करनी चाहिए। यदि घाव सूख गया हो और चरम पर फैला न हो, तो याजक को घोषणा करनी चाहिए कि व्यक्ति शुद्ध है। वह केवल एक खुरंड है। तब रोगी को अपने वस्त्र धोने चाहिए और फिर से शुद्ध होना चाहिए।
Und besieht es der Priester am siebten Tage zum zweiten Male, und siehe, das Übel ist blaß geworden, und das Übel hat nicht um sich gegriffen in der Haut, so soll der Priester ihn für rein erklären: es ist ein Grind; und er soll seine Kleider waschen, und er ist rein.
“किन्तु यदि व्यक्ति ने याजक को फिर अपने आपको सुद्ध बनाने के लिए दिखा लिया हो और उसके बाद चर्मरोग त्वचा पर अधिक फैलने लगे तो उस व्यक्ति को फिर याजक के पास आना चाहिए।
Wenn aber der Grind in der Haut um sich greift, nachdem er sich dem Priester gezeigt hat zu seiner Reinigung, so soll er sich dem Priester zum zweiten Male zeigen;
याजक को जाँच करके देखना चाहिए। यदि घाव चर्म पर फैला हो तो याजक को घोषमा करनी चाहिए कि वह व्यक्ति अशुद्ध है अर्थात् उसे कोई भयानक चर्मरोग है।
und besieht ihn der Priester, und siehe, der Grind hat in der Haut um sich gegriffen, so soll der Priester ihn für unrein erklären: es ist der Aussatz.
“यदि व्यक्ति को भयानक चर्मरोग हुआ हो तो उसे याजक के पास लाया जाना चाहिए।
Wenn ein Aussatzübel an einem Menschen entsteht, so soll er zu dem Priester gebracht werden.
याजक को उस व्यक्ति की जाँच करके देखना चाहिए। यदि चर्म पर सफेद दाग हो और उसमे सूजन हो, उस स्थान के बाल सफेद हो गए हों और यदि वहाँ घाव कच्चा हो
Und besieht ihn der Priester, und siehe, es ist eine weiße Erhöhung in der Haut, und sie hat das Haar in weiß verwandelt, und ein Mal rohen Fleisches ist in der Erhöhung,
तो यह कोई भयानक चर्मरोग है जो उस व्यक्ति को बहुत समय से है। अत: याजक को उस व्यक्ति को अशुद्ध घोषित कर देना चाहिए। याजक उस व्यक्ति को केवल थोड़े से समय के लिए ही अन्य लोगों से अलग नहीं करेगा। क्यों? क्योंकि वह जानता है कि वह व्यक्ति अशुद्ध है।
so ist es ein alter Aussatz in der Haut seines Fleisches, und der Priester soll ihn für unrein erklären; er soll ihn nicht einschließen, denn er ist unrein.
“यदि कभी चरमरोग व्यक्ति के सारे शरीर पर फैल जाए, वह चर्मरोग उस व्यक्ति के चरम को सिर से पाँव तक ढकले,
Wenn aber der Aussatz in der Haut ausbricht, und der Aussatz die ganze Haut dessen, der das Übel hat, bedeckt, von seinem Kopfe bis zu seinen Füßen, wohin auch die Augen des Priesters blicken;
और याजक देखे कि चर्मरोग पूरे शरीर को इस प्रकार ढके है कि उस व्यक्ति का पूरा शरीर ही सफेद हो गया है तो याजक को उसे शुद्ध घोषित कर देना चाहिए।
und der Priester besieht ihn, und siehe, der Aussatz hat sein ganzes Fleisch bedeckt, so soll er den, der das Übel hat, für rein erklären; hat es sich ganz in weiß verwandelt, so ist er rein.
किन्तु यदि व्यक्ति का चरम घाव जैसा कच्चा हो तो वह शुद्ध नहीं है।
An dem Tage aber, da rohes Fleisch an ihm gesehen wird, wird er unrein sein.
जब याजक कच्चा चर्म देखे, तब उसे घोषित करना चाहिए कि व्यक्ति अशुद्ध है। कच्चा चर्म शुद्ध नहीं है। यह भयानक चर्मरोग है।
Und sieht der Priester das rohe Fleisch, so soll er ihn für unrein erklären; das rohe Fleisch ist unrein: es ist der Aussatz.
“यदि चर्म फिर कच्चा पड़ जाये और सफेद हो जाये तो व्यक्ति को याजक के पास आना चाहिए।
Wenn aber das rohe Fleisch sich ändert und in weiß verwandelt wird, so soll er zu dem Priester kommen;
याजक को उस व्यक्ति की जाँच करके देखना चाहिए। यदि रोग ग्रस्त अंग सफेद हो गया हो तो याजक को घोषित करन चाहिए कि वह व्यक्ति जिसे छूत रोग है, वह अंग शुद्ध है। सो वह व्यक्ति शुद्ध है।
und besieht ihn der Priester, und siehe, das Übel ist in weiß verwandelt, so soll der Priester den, der das Übel hat, für rein erklären: er ist rein.
“हो सकता है कि शरीर के चर्म पर कोई फोड़ा हो। और फोड़ा ठीक हो जाय।
Und wenn im Fleische, in dessen Haut, eine Beule entsteht und wieder heilt,
किन्तु फोड़े की जगह पर सफेद सूजन या गहरी लाली लिए सफेद और चमकीला दाग रह जाय तब चर्म का यह स्थान याजक को दिखाना चाहिए।
und es entsteht an der Stelle der Beule eine weiße Erhöhung oder ein weiß-rötlicher Flecken, so soll er sich dem Priester zeigen;
याजक को उसे देखना चाहिए। यदि सूजन चर्म से गहरा है और इस पर के बाल सफेद हो गये हैं तो याजक को घोषणा करनी चाहिए कि वह व्यक्ति अशुदध है। वह दाग भयानक चर्म रोग है। यह फोड़े के भीतर से फूट पड़ा है।
und besieht ihn der Priester, und siehe, der Flecken erscheint niedriger als die Haut, und sein Haar hat sich in weiß verwandelt, so soll der Priester ihn für unrein erklären; es ist das Übel des Aussatzes, er ist in der Beule ausgebrochen.
किन्तु यदि याजक उस स्थान को देखता है और उस पर सफेद बाल नहीं हैं और दाग चर्म से गहरा नहीं है, बल्कि धुंधला है तो याजक को उस व्यक्ति को सात दिन के लिए अलग करना चाहिए।
Und wenn der Priester ihn besieht, und siehe, es ist kein weißes Haar darin, und der Flecken ist nicht niedriger als die Haut und ist blaß, so soll der Priester ihn sieben Tage einschließen.
यदि दाग का अधिक भाग चर्म पर फैलता है तब याजक को घोषणा करनी चाहिए कि व्यक्ति अशुद्ध है। यह छूत रोग है।
Wenn er aber in der Haut um sich greift, so soll der Priester ihn für unrein erklären: es ist das Übel.
किन्तु यदि सफेद दाग अपनी जगह बना रहता है, फैलता नहीं तो वह पुराने फोड़े का केवल घाव है। याजक को घोषणा करनी चाहिए कि व्यक्ति शुद्ध है।
Und wenn der Flecken an seiner Stelle stehen bleibt, wenn er nicht um sich gegriffen hat, so ist es die Narbe der Beule; und der Priester soll ihn für rein erklären.
“किसी व्यक्ति का चर्म जल सकता है। यदि कच्चा चर्म सफेद या लालीयुक्त दाग होता है तो याजक को इसे देखना चाहिए। यदि वह दाग चर्म से गहरा मालूम हो और उस स्थान के बाल सफेद हों तो यह भयंकर चर्म रोग है। जो जले में से फूट पड़ा है तब याजक को उस व्यक्ति को अशुद्ध घोषित करना चाहिए। यह भयंकर चर्म रोग है।
Oder wenn in der Haut des Fleisches eine feurige Entzündung entsteht, und das Mal der Entzündung wird ein weiß-rötlicher oder weißer Flecken,
“किसी व्यक्ति का चर्म जल सकता है। यदि कच्चा चर्म सफेद या लालीयुक्त दाग होता है तो याजक को इसे देखना चाहिए। यदि वह दाग चर्म से गहरा मालूम हो और उस स्थान के बाल सफेद हों तो यह भयंकर चर्म रोग है। जो जले में से फूट पड़ा है तब याजक को उस व्यक्ति को अशुद्ध घोषित करना चाहिए। यह भयंकर चर्म रोग है।
und der Priester besieht ihn, und siehe, das Haar ist in weiß verwandelt im Flecken, und er erscheint tiefer als die Haut, so ist es der Aussatz; er ist in der Entzündung ausgebrochen, und der Priester soll ihn für unrein erklären: es ist das Übel des Aussatzes.
किन्तु याजक यदि उस स्थान को देखता है और सफेद दाग में सफेद बाल नहीं हैं और दाग चर्म से गहरा नहीं है, बल्कि हल्का है तो याजक को उसे सात दिन के लिए ही अलग करना चाहिए।
Und wenn der Priester ihn besieht, und siehe, es ist kein weißes Haar in dem Flecken, und er ist nicht niedriger als die Haut und ist blaß, so soll der Priester ihn sieben Tage einschließen.
सातवें दिन याजक को उस व्यक्ति को फिर देखना चाहिए। यदि दाग चर्म पर फैले तो याजक को घोषणा करनी चाहिए कि व्यक्ति अशुद्ध है। यह भयंकर चर्म रोग है।
Und der Priester soll ihn am siebten Tage besehen; wenn er in der Haut um sich greift, so soll der Priester ihn für unrein erklären: es ist das Übel des Aussatzes.
किन्तु यदि सफेद दाग चर्म पर न फैल, अपितु धुंधला हो तो यह जलने से पैदा हुई सूजन है। याजक को उस व्यक्ति को शुद्ध घोषित करना चाहिए। यह केवल जले का निशान है।
Und wenn der Flecken an seiner Stelle stehen bleibt, wenn er nicht um sich gegriffen hat in der Haut und ist blaß, so ist es die Erhöhung der Entzündung; und der Priester soll ihn für rein erklären, denn es ist die Narbe der Entzündung.
“किसी व्यक्ति के सिर की खाल पर या दाढ़ी में कोई छूत रोग हो सकता है।
Und wenn ein Mann oder ein Weib ein Übel am Haupte oder am Barte bekommt,
याजक को छूत के रोग को देखना चाहिए। यदि छूत का रोग चर्म से गहरा मालूम हो और इसके चारों ओर के बाल बारीक और पीले हों तो याजक को घोषणा करनी चाहिए कि व्यक्ति अशुद्ध है। यह बुरा चर्मरोग है।
und der Priester besieht das Übel, und siehe, es erscheint tiefer als die Haut, und goldgelbes, dünnes Haar ist darin, so soll der Priester ihn für unrein erklären: es ist Schorf, es ist der Aussatz des Hauptes oder des Bartes.
यदि रोग चर्म से गहरा न मालूम हो, और इसमें कोई काला बाल न हो तो याजक को उसे सात दिन के लिए अलग कर देना चाहिए।
Und wenn der Priester das Übel des Schorfes besieht, und siehe, es erscheint nicht tiefer als die Haut, und es ist kein schwarzes Haar darin, so soll der Priester den, der das Übel des Schorfes hat, sieben Tage einschließen.
सातवें दिन याजक को छूत के रोगी को देखना चाहिए। यदि रोग फैला नहीं है या इसमे पीले बाल नहीं उग रहे हैं और रोग चर्म से गहरा नहीं है,
Und besieht der Priester das Übel am siebten Tage, und siehe, der Schorf hat nicht um sich gegriffen, und es ist kein goldgelbes Haar darin, und der Schorf erscheint nicht tiefer als die Haut,
तो व्यक्ति को बाल काट लेने चाहिये। किन्तु उसे रोग वाले स्थान के बाल नहीं काटने चाहिए। याजक को उस व्यक्ति को और सात दिन के लिए अलग करना चाहिए।
so soll er sich scheren; aber den Schorf soll er nicht scheren; und der Priester schließe den, der den Schorf hat, zum zweiten Male sieben Tage ein.
सातवें दिन याजक को रोगी को देखना चाहिए। यदि रोग चर्म मे नहीं फैला है और यह चर्म से गहरा नहीं मालूम होता है तो याजक को घोषणा करनी चाहिए कि व्यक्ति शुद्ध है। व्यक्ति को अपने वस्त्र धोने चाहिए तथा शुद्ध हो जाना चाहिए।
Und besieht der Priester den Schorf am siebten Tage, und siehe, der Schorf hat nicht um sich gegriffen in der Haut, und er erscheint nicht tiefer als die Haut, so soll der Priester ihn für rein erklären; und er soll seine Kleider waschen, und er ist rein.
किन्तु यदि व्यक्ति के शुद्ध हो जाने के बाद चर्म में रोग फैलता है
Wenn aber, nach seiner Reinigung, der Schorf in der Haut um sich greift,
तो याजक को फिर व्यक्ति को देखना चाहिए। यदि रोग चर्म में फैला है तो याजक को पीले बालों को देखने की आवश्यकता नहीं है, व्यक्ति अशुद्ध है।
und der Priester besieht ihn, und siehe, der Schorf hat in der Haut um sich gegriffen, so soll der Priester nicht nach dem goldgelben Haare forschen; er ist unrein.
किन्तु यदि याजक यह समझता है कि रोग का बढ़ना रुक गया है और इसमें काले बाल उग रहे हैं तो रोग अच्छा हो गया है। व्यक्ति शुद्ध है। याजक को घोषणा करनी चाहिए कि व्यक्ति शुद्ध है।
Und wenn in seinen Augen der Schorf stehen geblieben ist, und es ist schwarzes Haar darin gewachsen, so ist der Schorf geheilt; er ist rein, und der Priester soll ihn für rein erklären.
“जब व्यक्ति के चर्म पर सफेद दाग हों,
Und wenn ein Mann oder ein Weib in der Haut ihres Fleisches Flecken bekommen, weiße Flecken,
तो याजक को उन दागों को देखना चाहिए। यदि व्यक्ति के चर्म के दाग धुंधले सफेद हैं, तो रोग केवल अहानिकारक फुंसियाँ है। वह व्यक्ति शुद्ध है।
und der Priester besieht sie, und siehe, in der Haut ihres Fleisches sind blasse, weiße Flecken, so ist es ein Ausschlag, der in der Haut ausgebrochen ist: er ist rein.
“किसी व्यक्ति के सिर के बाल झड़ सकते है वह शुद्ध है यह केवल गंजापन है।
Und wenn einem Manne das Haupthaar ausfällt, so ist er ein Glatzkopf: er ist rein;
किसी आदमी के सिर के माथे के बाल झड़ सकते हैं। वह शुद्ध है। यह दूसरे प्रकार का गंजापन है।
und wenn ihm das Haupthaar gegen das Gesicht zu ausfällt, so ist er ein Kahlkopf: er ist rein.
किन्तु यदि उसके सिर की चमड़ी पर लाल सफेद फुंसियाँ हैं तो यह भयानक चर्म रोग है।
Und wenn an der Hinter- oder an der Vorderglatze ein weiß-rötliches Übel ist, so ist es der Aussatz, der an seiner Hinter- oder an seiner Vorderglatze ausgebrochen ist.
याजक को ऐसे व्यक्ति को देखना चाहिए। यदि छूत ग्रस्त त्वचा की सूजन लाली युक्त सफेद है और कुष्ठ की तरह शरीर के अन्य भागों पर दिखाई पड़ रही है
Und besieht ihn der Priester, und siehe, die Erhöhung des Übels ist weiß-rötlich an seiner Hinter- oder an seiner Vorderglatze, gleich dem Aussehen des Aussatzes in der Haut des Fleisches,
तो उस व्यक्ति के सिर की चमड़ी पर भयानक चर्मरोग है। व्यक्ति अशुद्ध है, याजक को घोषणा करनी चाहिए।
so ist er ein aussätziger Mann: Er ist unrein; der Priester soll ihn für gänzlich unrein erklären; sein Übel ist an seinem Haupte.
यदि किसी व्यक्ति को भयानक चर्मरोग हो तो उस ब्यक्ति को अन्य लोगों को सावधान करना चाहिए। उस व्यक्ति को जोर से ‘अशुद्ध! अशुद्ध! कहना चाहिए, उस व्यक्ति के वस्त्रों को, सिलाई से फाड़ देना चाहिए उस व्यक्ति को, अपने बालों को सँवारना नहीं चाहिए और उस व्यक्ति को अपना मुख ढकना चाहिए।
Und der Aussätzige, an dem das Übel ist, seine Kleider sollen zerrissen, und sein Haupt soll entblößt sein, und er soll seinen Bart verhüllen und ausrufen: Unrein, unrein!
जो व्यक्ति अशुद्ध होगा उसमें छूत का रोग सदा रहेगा। वह व्यक्ति अशुद्ध है। उसे अकेले रहना चाहिए। उनका निवास डेरे से बाहर होना चाहिए।
Alle die Tage, da das Übel an ihm ist, soll er unrein sein; er ist unrein: allein soll er wohnen, außerhalb des Lagers soll seine Wohnung sein.
“कुछ वस्त्रों पर फफूँदी लग सकती है। वस्त्र सन का या ऊनी हो सकता है। वस्त्र बुना हुआ या कढ़ा हुआ हो सकता है। फफूँदी किसी चमड़े या चमड़े से बनी किसी चीज पर हो सकती है।
Und wenn an einem Kleide ein Aussatzübel entsteht, an einem Kleide von Wolle oder an einem Kleide von Linnen;
“कुछ वस्त्रों पर फफूँदी लग सकती है। वस्त्र सन का या ऊनी हो सकता है। वस्त्र बुना हुआ या कढ़ा हुआ हो सकता है। फफूँदी किसी चमड़े या चमड़े से बनी किसी चीज पर हो सकती है।
oder an einer Kette oder an einem Einschlag von Linnen oder von Wolle; oder an einem Felle oder an irgend einem Fellwerk;
यदि फफूँदी हरी या लाल हो तो उसे याजक को दिखाना चाहिए।
und das Übel ist grünlich oder rötlich am Kleide, oder am Felle, oder an der Kette oder am Einschlag, oder an irgend einem Gerät von Fell, so ist es das Übel des Aussatzes, und man soll es den Priester besehen lassen.
याजक को फफूँदी देखनी चाहिए। उसे उस चीज को सात दिन तक अलग स्थान पर रखना चाहिए।
Und der Priester besehe das Übel und schließe das, woran das Übel ist, sieben Tage ein.
सातवें दिन, याजक को फफूँदी देखनी चाहिए। यह महत्वपूर्ण नहीं है कि फफूँदी चमड़े या कपड़े पर है। यह महत्वपूरण नहीं कि वस्त्र बुना हुआ या कढ़ा हुआ है। यह महत्वपूर्ण नहीं कि चमड़े का उपयोग किस लिए किया गया था। यदि फफूँदी फैलती है तो वह कपड़ा या चमड़ा अशुद्ध है। वह फफूँदी अशुद्ध है। याजक को उस कपड़े या चमड़े को जला देना चाहिए।
Und sieht er das Übel am siebten Tage, daß das Übel um sich gegriffen hat am Kleide, oder an der Kette oder am Einschlag, oder am Felle nach allem, wozu das Fell verarbeitet wird, so ist das Übel ein fressender Aussatz: es ist unrein.
सातवें दिन, याजक को फफूँदी देखनी चाहिए। यह महत्वपूर्ण नहीं है कि फफूँदी चमड़े या कपड़े पर है। यह महत्वपूरण नहीं कि वस्त्र बुना हुआ या कढ़ा हुआ है। यह महत्वपूर्ण नहीं कि चमड़े का उपयोग किस लिए किया गया था। यदि फफूँदी फैलती है तो वह कपड़ा या चमड़ा अशुद्ध है। वह फफूँदी अशुद्ध है। याजक को उस कपड़े या चमड़े को जला देना चाहिए।
Und man soll das Kleid, oder die Kette oder den Einschlag von Wolle oder von Linnen, oder jedes Gerät von Fell, woran das Übel ist, verbrennen; denn es ist ein fressender Aussatz: es soll mit Feuer verbrannt werden.
“यदि याजक देखे कि फफूँदी फैली नहीं तो वह कपड़ा या चमड़ा धोया जाना चाहिए। यह महत्वपूर्ण नहीं कि यह चमड़ा है या कपड़ा, अथवा कपड़ा बुना हुआ है या कढ़ा हुआ, इसे धोना चाहिए।
Und wenn der Priester es besieht, und siehe, das Übel hat nicht um sich gegriffen am Kleide, oder an der Kette oder am Einschlag, oder an irgend einem Gerät von Fell,
याजक को लोगों को यह आदेश देना चाहिए कि वे चमड़े या कपड़े के टुकड़ों को धोएं, तब याजक वस्त्रों को और सात दिनों के लिए अलग करे।
so soll der Priester gebieten, daß man das wasche, woran das Übel ist; und er soll es zum zweiten Male sieben Tage einschließen.
उस समय के बाद याजक को फिर देखना चाहिए। यदि फफूँदी ठीक वैसी ही दिखाई देती है तो वह वस्तु अशुद्ध है। यह महत्वपूर्ण नहीं है कि छूत फैली नहीं है। तुम्हें उस कपड़े या चमड़े को जला देना चाहिए।
Und besieht der Priester das Übel nach dem Waschen, und siehe, das Übel hat sein Aussehen nicht geändert, und das Übel hat nicht um sich gegriffen, so ist es unrein; du sollst es mit Feuer verbrennen: es ist eine Vertiefung auf seiner kahlen Hinter- oder Vorderseite.
“किन्तु यदि याजक उस चमड़े या कपड़े को देखता है कि फफूँदी मुरझा गई है तो याजक को चमड़े या कपड़े के फफूँदी युक्त दाग को चमड़े या कपड़े से फाड़ देना चाहिए। यह महत्वपूर्ण नहीं कि कपड़ा कढ़ा हुआ है या बारीक बुना हुआ है।
Und wenn der Priester es besieht, und siehe, das Übel ist blaß geworden nach dem Waschen, so soll er es abreißen vom Kleide, oder vom Felle, oder von der Kette oder vom Einschlag.
किन्तु फफूँदी उस चमड़े या कपड़े पर लौट सकती है। यदि ऐसा होता है तो फफूँदी बढ़ रही है। उस चमड़े या कपड़े को जला देना चाहिए।
Und wenn es noch gesehen wird am Kleide, oder an der Kette oder am Einschlag, oder an irgend einem Gerät von Fell, so ist es ein ausbrechender Aussatz: du sollst mit Feuer verbrennen, woran das Übel ist.
किन्तु यदि धोने के बाद फफूँदी न लौटे, तो वह चमड़ा या कपड़ा शुद्ध है। इसका कोई महत्व नहीं कि कपड़ा कढ़ा हुआ या बुना हुआ था। वह कपड़ा शुद्ध है।”
Und das Kleid, oder die Kette oder der Einschlag, oder irgend ein Gerät von Fell, das du wäschest, und das Übel weicht daraus: es soll zum zweiten Male gewaschen werden, und es ist rein.
चमड़े या कपड़े पर की फफूँदी के विषय में ये नियम हैं। इसका कोई महत्व नहीं कि कपड़ा कढ़ा हुआ है या बुना हूआ है।
Das ist das Gesetz des Aussatzübels an einem Kleide von Wolle oder von Linnen, oder an einer Kette oder an einem Einschlag, oder an irgend einem Gerät von Fell, um es für rein oder für unrein zu erklären.